I am Shalabh Gupta from India. Poem writing is my passion. I think, these poems are few pages of my autobiography. My poems are my best friends.
Monday, February 7, 2011
"मुझ से बातें किया करो...."
हज़ार गम हैं ज़िन्दगी में,
किसी से शिकवे-शिकायत क्या करो ?
दुनिया लगे जब अजनबी सी,
मुझ से बातें किया करो ।
शायद, कुछ कह रहीं हैं धड़कने ;
कभी अपने दिल की कहानी सुना करो ।
जब नींद न आये रातों में ,
मेरी यादों को अपने सिरहाने रखा करो ।
हर रोज ख्वाबों में हम आयेगें ,
थोड़ी जगह छोड़ कर सोया करो ।
जो कुछ कहना है मुझसे,
सारी बातें कह दिया करो ।
अकेले होकर भी , अकेले नहीं हो तुम
अपने आसपास , मुझे महसूस किया करो ।
मैंने वही किया जो था मेरे लिए ज़रूरी ,
वक्त की थोड़ी मजबूरियां समझा करो ।
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