Sunday, April 13, 2014

"नये ज़ख्म..."

जो किसी के दर्द में शामिल नहीं हैं,

वो लोग दोस्ती के काबिल नहीं हैं ,

पुरानों ने दिये कुछ नये ज़ख्म,

नये दोस्तों की और ज़रूरत नहीं हैं।

(शलभ गुप्ता "राज")

Wednesday, February 26, 2014

"प्रेम-गीत ..."

खामोशियाँ बोलने लगीं हैं, 
"राज" सारे खोलने लगी हैं ,
कान्हा की बांसुरी के संग ,
गोपियाँ प्रेम-गीत गाने लगी हैं . "

Wednesday, February 19, 2014

"प्यास..."

बादल झूठे हो सकते हैं,
धरती की प्यास नहीं,
मुस्कराहटें झूठी हो सकती हैं,
मगर एहसास नहीं।  

Saturday, February 15, 2014

" धरोहर..."

वो फूल आज भी महकते हैं,
दिल में दीये आज भी जलते हैं,
तेरी दुआएँ हैं धरोहर मेरी,
तेरी यादों संग हम चलते हैं।  
( शलभ गुप्ता "राज")

Tuesday, February 11, 2014

"खुशबू..."

रूप बदल-बदलकर मुझसे मिलने आता है,
वो शख्स मुझसे ना जाने क्या चाहता है ?
जब भी उससे पूछा उसके आने का सबब,
बस खुशबू की तरह सांसों में घुल जाता है .
( शलभ गुप्ता "राज")

Sunday, February 9, 2014

"जज्बात..."

यूँ तो दुनिया देखी हैं हमने, हज़ारों लोगों से मिले हैं।
सच्चे जज्बात , बस बुजुर्गों की दुआओं में मिले हैं।  
( शलभ गुप्ता "राज")

" मोहब्बत..."

खामोश हूँ मगर बेखबर नहीं,
शायद मोहब्बत की  होती जुबां नहीं !

Friday, February 7, 2014

"दिल और धड़कन ..."

एक दिन अपने दिल से होकर नाराज़,
बातों-बातों में हमने उससे कह दिया।
ऐ दिल ना परेशान कर और धडकना छोड़ दे।
दिल बोला बड़े इत्मीनान से ,
छोड़ दूंगा मैं उस दिन धडकना ,
"राज" प्यार करना तू जिस दिन छोड़ दे।
 ( शलभ गुप्ता "राज")

"आयाम..."

नये लोग मिले नये ख्यालात मिले हैं।
मेरे शब्दों को नये अलंकार मिले हैं ।
जब से मिले हैं आप सब मुझे ,
जीने के मुझे नये आयाम मिले हैं।

Thursday, February 6, 2014

" राहें..."

ज़िन्दगी के घुमावदार रास्तों ,
संकरे मोड़ों के गुज़र जाने के बाद ,
दिखाई देने लगती हैं हमको ,
बड़ी-बड़ी और खुली राहें।