Wednesday, April 12, 2017

"दास्ताँ.."
















समुन्दर किनारे बैठकर , लहरों से बातें की बहुत ।
सांझ ढले अपने घर जाता सूरज, लौटते पंछी याद आये बहुत ।
बातें थी कुछ ख़ास दिल में ही रहीं, कहनी थी जो उनसे बहुत ।
खुद से करते रहे हम बातें, कभी रोये कभी मुस्कराये बहुत ।
कालेज के दिन, कैंटीन और "दोस्त" याद आये बहुत ।
दिल के बागवां से, यादों के फूल समेट लाये बहुत ।
आज भी आती है , उन फूलों से खुशबू बहुत ।
तितलियाँ, फूल और यादें , मेरे जीने के लिए हैं बहुत ।
और क्या कहें अब जाने दो , दास्ताँ यह लम्बी है बहुत ।

(शलभ गुप्ता "राज")

Saturday, April 8, 2017

"बेटी.."

[१]
"बेटी" सिर्फ एक शब्द नहीं,
खुशियों का पावन नाम है ।
उससे ही है पूजा-आरती,
वह घर तीरथ-धाम है ।
[२]
तुलसी का पौधा ज़रूरी नहीं,
जहाँ बेटी का जन्म हो जाता है ।
जिस घर में होती है "बेटी",
वह घर मंदिर हो जाता है । 

(शलभ गुप्ता)

Thursday, March 23, 2017

"अपने दिल की भी सुना करो ..."

कभी-कभी अपने दिल की भी सुना करो ।
मन की तितलियों को उड़ने दिया करो ।
ये माना काम में बहुत मसरूफ हो मगर,
कभी-कभी कुछ लम्हे खुद को भी दिया करो ।
बारिशों के मौसम में भी भीगा करो।
उदास ज़िन्दगी में इन्द्रधनुषी रंग भरा करो ।
कभी-कभी खुल कर भी हँसा करो ।
तितलियों को किताबों में मत रखा करो।
उनके संग-संग आसमां में उड़ा करो।
कभी-कभी अपने दिल की भी सुना करो।

(कुछ वर्ष पूर्व लिखी हुई एक कविता )
-  शलभ गुप्ता "राज"

Friday, March 10, 2017

"रंग.."

मेरी ज़िन्दगी के रंग,
इंद्रधनुषी नहीं तो क्या,
मटमैले तो हैं।  

Wednesday, March 8, 2017

"Banganga Tank.."

Banganga Tank is an ancient water tank which is part of the Walkeshwar 
Temple Complex in Malabar Hill area of Mumbai in India. 
I love this place very much, I wrote many poems here. 

Friday, March 3, 2017

"नये सफर.."

यादों के सहारे कब तक जिया जायेगा ,
चल उठ, अब फिर से जिया जायेगा।
कल की गठरी को मन से उतार,
अब नये सफर पर चला जायेगा।
तमाम उम्र झुलसती रही ज़िन्दगी,
अब के बारिशों में खूब भीगा जायेगा।
भीड़ में भी तन्हा ही चलते रहे "शलभ",
अब किसी को हमराह बनाया जायेगा।
© Shalabh Gupta
11 April 2016

Monday, February 27, 2017

"अधूरे गीत.."

कई गीत आज भी अधूरे हैं,
डायरी के कई पन्ने कोरे हैं,
समझ ना पाए शब्दों को तुम,
गीत वो पूरे होकर भी अधूरे हैं।


"नये इन्द्रधनुष.."

आशाओं के नये इन्द्रधनुष बने,
आप सबकी दुआ रंग लायी है ,
साज के टूटे तारों को जोड़कर ,
फिर धुन एक नयी सजायी है .

Thursday, February 23, 2017

"ठहरी हुई चाँदनी..."

धीरे-धीरे ही सही,
फिर से चलने लगी है.
तेरा शुक्रिया "ऐ ज़िन्दगी",
जैसे घर के आँगन में,
मुंडेर पर ठहरी हुई चाँदनी,
रौशनी बिखेरने लगी है।
(शलभ गुप्ता "राज")


Saturday, February 18, 2017

"एक कविता.."


बहुत दिन हुए,
तुमसे मिले हुए ,
दिल की बातें किये हुए .
तुम पर,
एक कविता लिखे हुए ।

(शलभ गुप्ता "राज")