Thursday, June 22, 2017

"घुटन.."

"आँसू" हो या "बारिशें" ,
बरस जाएँ तो ही अच्छा है ,
वरना  घुटन बहुत हो जाती है,
दिल में हो या फिर मौसम में. 
 @ शलभ गुप्ता

Tuesday, June 20, 2017

"लिखना है कुछ ख़ास सा..."

डायरी के कुछ पन्ने भरे हैं।
कुछ पन्नों के कोने मुड़े हैं,
और बहुत से अभी कोरे हैं।
लिखना है  कुछ ख़ास सा।
पहले प्यार के एहसास सा।
अमलतास के फूल ;
मुंबई की बारिशें,
घर लौटते पंछी ,
और ईद के चाँद सा।
लिखना है कुछ ख़ास सा।
@ शलभ गुप्ता 

Thursday, June 15, 2017

"चिठ्ठी..."

घर से चिठ्ठी आयी है।
हिचकियाँ संग लायी है।
भीगे कागज में लिपटी हुई,
अपनों की याद आयी है।
@ शलभ गुप्ता 

Wednesday, June 14, 2017

"मुंबई की बारिशें.."

मुंबई की बारिशें,
कर रहीं मेरा इंतज़ार।
जल्द ही आयेगें हम,
भीगने  फिर एक  बार।  

Monday, June 12, 2017

"शिकायत.."

जल्दी ही आपसे मुलाकात होगी,
दूर ये आपकी शिकायत होगी।


"मौसम..."

यादों का भी एक मौसम होना चाहिये ,
दिल को भी तो  थोड़ा आराम चाहिये।  

Tuesday, June 6, 2017

जन्मदिन की शुभकामनायें - 6 जून 2017

ज़िन्दगी की तेज़ तपन में,
अपनेपन की छाँव मिले।
उम्र के हर मोड़ पर,
ख़ुशियाँ बेमिसाल मिलें।
तितलियों को उड़ने के लिये,
नये- नये आसमान मिलें।
सुख और समृद्धि हमेशा,
आपके घर-आँगन में मिले।
मिलेंगे शायद, फिर किसी दिन;
संग-संग  हैं यादों के काफिले।
गीत - कविता लिखते रहें हम,
महकते रहें बातों  के सिलसिले।
(शलभ गुप्ता "राज")


Monday, June 5, 2017

"तेज़ धूप.."

ज़िन्दगी  की तेज़ धूप ,
तपती रेत पर नंगे पैर,
और ये मीलों का सफर,
बस चलते जाना है।
(शलभ गुप्ता )  

Wednesday, April 26, 2017

"जुगनू.."

यादों की गठरी लिये,
यह लम्बा सफर,
रात के मुसाफिर,
जुगनू हैं हम,
आंसू बनकर;
आँखों में झिलमिलायेगें, 
तुमको बहुत याद आयेंगें।  
( शलभ गुप्ता )

Saturday, April 15, 2017

"किताब.."


मेरे दिल ने भी चाहा था कई बार,
अपनी कविताओं को एक नाम दूँ मैं।
उदास शब्दों को एक मुस्कराहट दूँ मैं।
तुम आये ज़िन्दगी में बनकर प्यार ,
तुम्हें ही पढ़ा, तुम्हें ही लिखा मैंने ,
हरेक पन्ने पर कई-कई बार।  
वक्त की आंधियां चली कुछ इस तरह,
"शब्द" सारे, ना जाने कहाँ खो गये।
मेरे हाथों में बस कोरे पन्ने ही रह गये।
हम, अपनी किताब लिखने से रह गये।
(शलभ गुप्ता "राज")