Wednesday, July 11, 2018

"कहाँ भीग पाते हैं हम.."

A.C. कमरों में बैठकर,
T.V. पर बारिशों का हाल देखकर,
शहर में हुए जलभराव की, 
अख़बार में छपी तस्वीरें देखकर,
कहाँ भीग पाते हैं हम।  
@ Shalabh Gupta


Friday, June 29, 2018

"इन बारिशों के मौसम में ..."

तुम भीगना इस बार बारिशों में,
मुझे नहीं भीगना है। 
मुझे तो ढेर सारे पौधे लगाने हैं ,
इन बारिशों के मौसम में।

@ शलभ गुप्ता


Saturday, June 23, 2018

"मेघा .."

मेघा, तुम कब आओगे ?
मेरे देश ।  
आपकी प्रतीक्षा में,
साँसें रह गयी शेष । 

शलभ गुप्ता "राज"

Tuesday, June 19, 2018

"कुछ आंसू.."


"कुछ आंसू.."

डायरी के कुछ पन्नों के कोने,
मैंने मोड़कर रखे हैं।  
कुछ मुस्कारते लम्हें मैंने, 
आज भी सहेज कर रखे हैं।  
शायद लौट आओगे तुम एक दिन।  
इसीलिए इन पथराई आँखों में,
ख़ुशी के कुछ आंसू मैंने,
आज भी सहेज कर रखे हैं।  
  
@ शलभ गुप्ता "राज"

Friday, June 8, 2018

"तुलसी महके सदा आँगन में.."

6 जून है जन्मदिन आपका,
शुभकामनायें करें स्वीकार।
तुलसी महके सदा आँगन में ,
नित नयी रंगोली सजे घर-द्वार।
"सुख"-"समृद्धि" हमेशा संग रहें,
होंठ मुस्कराते रहें बार-बार।
आपके जीवन की "जन्मपत्री" पर,
"खुशियों" के हों अमिट हस्ताक्षर।
अनगिनित बाधाएं मिले राह में,
या समय रहे प्रतिकूल,
चलते रहें; चलते रहें, 
जीवन पथ पर निरंतर।
मेरी ओर से करें स्वीकार,
"कविता" का यह उपहार।
6 जून है जन्मदिन आपका,
शुभकामनायें करें स्वीकार।

@ शलभ गुप्ता "राज"

Wednesday, May 16, 2018

"इन बारिशों के मौसम में..."

तुम भीगना इस बार बारिशों में,
मुझे नहीं भीगना है। 
मुझे तो ढेर सारे पौधे लगाने हैं ,
इन बारिशों के मौसम में। 
रंग-बिरंगे गमलों में ,
सफ़ेद फूलों के पौधे। 
जो तुम्हे बहुत पसंद थे। 
यूँ तो कोई खुशबू नहीं थी उनमें,
मगर तुम्हारे छूने से महक जाते थे।
आ जाना फिर एक बार,
फूलों को छूने के लिए ,
आँगन को महकाने के लिए। 

@ शलभ गुप्ता

Saturday, May 12, 2018

"धूप ..'

चाहे कितने बंद कर लो दरवाजे सारे।
सुबह होने पर फिर आयेगा सूरज,
धूप को हौले-हौले घर में आना ही है।
ज़िन्दगी को फिर से मुस्कराना ही है। 
@ शलभ गुप्ता


Wednesday, May 9, 2018

"चिड़ियों, मैं कहीं भी रहूँ ..."













चिड़ियों, मैं कहीं भी रहूँ ,
तुम कभी चिंता मत करना ।
मेरे बच्चे सुबह और शाम ,
छत पर "दाना" रख दिया करेगें ।
सब कुछ तुम्हारा ही तो है ।
इन "दानों" पर हक़ तुम्हारा है ।
तुम कभी चिंता मत करना ।
मेरी छत पर रोजाना ,
इसी तरह आते रहना ।
अपने हिस्से का "दाना",
तुम इसी तरह चुगते रहना ।

@ शलभ गुप्ता 

"कुछ फूल..."

कुछ फूल यादों के,
मोहब्बत की राहों में।
सारे जवाब मिल गये,
उनकी नम आँखों में।

@ शलभ गुप्ता




















( अपने मोबाइल द्वारा ली गयी ये तस्वीर )