Thursday, March 28, 2019

"माता-पिता"

यूँ तो दुनिया देखी है हमने,
हज़ारों लोगों से मिलें हैं।
सच्चे ज़ज़्बात बस,
माता-पिता की दुआओं में मिले हैं।
@ शलभ गुप्ता


Friday, February 22, 2019

"धूप.."

गुनगुनी से धूप,
बादलों की चादर ओढ़े हुए।
जरा सी बारिशें,
ढेर सारी यादें लिए हुए।
@ शलभ गुप्ता  

"यादें"

बिन बुलाये मेहमान की तरह,
"यादें" हर रोज़ चली आतीं हैं। 
@ शलभ गुप्ता 

"एक कविता.."

बहुत दिन हुए,
तुमसे मिले हुए।
दिल की बातें किये हुए,
एक कविता लिखे हुए। 
@ शलभ गुप्ता 

Thursday, January 3, 2019

"नववर्ष 2019 .."

यूँ तो ज़िन्दगी में,
कई कैलेंडर बदल गये।
कुछ तारीखें आज भी,
संभालकर रखी हैं मैंने।
@ शलभ गुप्ता

Wednesday, December 26, 2018

"मोड़ .."

घुमावदार सीढ़ियाँ, और जीवन में मोड़ ,
ना आये जब तक, उसे जीना नहीं कहते।
दो कदम चलकर, जो थक जायें कदम,
ऐसे चलने को, फिर चलना नहीं कहते। 
@ शलभ गुप्ता

Monday, December 24, 2018

"स्वेटर.."

माँ, तुम कहाँ हो ?
जाड़े शुरू हुये कई दिन हो गये।
चाहे, सपनों में ही आ जाना।
अपने हाथों से मेरे लिये,
एक "स्वेटर" बुन जाना !
@ शलभ गुप्ता
अपने गृह नगर , मुरादाबाद से !


Wednesday, December 5, 2018

"जाड़ों का मौसम.."

राह में सूरज, 
कोहरे से अठखेलियाँ करने लगा है। 
इसीलिए शायद, 
मेरे शहर में देर से आने लगा है । 
अब मुझे देर से जगाने लगा है । 
गुनगुनी धूप का साथ, 
मन को बहुत भाने लगा है । 
आओ स्वागत करें हम सब मिलकर , 
जाड़ों का मौसम अब आने लगा है । 
© शलभ गुप्ता 
(अपने गृह नगर मुरादाबाद से )


Saturday, November 10, 2018

मन के अंधेरे..

अपने मन के अंधेरे, सारे बांट लें हम, 
रोशन यह अपना शहर हो जायेगा !! 
@ शलभ गुप्ता 

शुभकामनायें...

आजकल डिजिटल हो गयीं,
सारी शुभकामनायें !
अपनों की आवाज सुने,
एक जमाना हो गया !
@ शलभ गुप्ता