Wednesday, November 16, 2022

"माता पिता की दुआएं..."

 [१]
ठहरती साँसों को नया जीवन मिला है। 
माता पिता की दुआओं का यह सिला है। 

[२]
चलो, अच्छा हुआ,
मोबाइल का साथ,
अब कम हो गया है। 
दवाइओं के डिब्बे ,
के रूप में नया साथ,
मुझे जो मिल गया है। 

" हृदयघात.."

हृदयघात की पीड़ा सहता रहा,
नासमझ फिर भी मैं ठहरा नहीं। 
सबके दर्द को तो जाना अक्सर,
अपने दिल की बात मैं समझा नहीं। 


Saturday, September 3, 2022

प्रिय सितम्बर ..

प्रिय सितम्बर,
कैसे हो तुम।
कहां रहे इतने दिन,
बहुत समय बाद,
मिले हो तुम।
चलो, घर चलो।
चाय साथ पियेंगे,
शिकवे शिकायत,
मिल कर दूर करेंगें।
कुछ कहना तुम बातें,
कुछ हम अपनी कहेंगे।

#poet_shalabh_gupta
#welcome #september 


Tuesday, August 30, 2022

शीर्षक |: "ज़िन्दगी"

 











(दिनांक 27 अगस्त 2022 को, 
हिंदी साप्ताहिक समाचार पत्र,
"भोजपुरी राज्य सन्देश"
में प्रकाशित)
शीर्षक |: "ज़िन्दगी" 

"ज़िन्दगी"

 











(दिनांक 26 अगस्त 2022 को, 
हिंदी समाचार पत्र,
दैनिक युगपक्ष , जैसलमेर
में प्रकाशित)
शीर्षक |: "ज़िन्दगी" 

 


Thursday, August 11, 2022

"रंगमंच" है जिंदगी..

दर्शक भी हम,
कलाकार भी हम। 
ताली बजाने वाले भी हम,
पर्दा गिराने वाले भी हम। 
लाइट वाले भी हम,
साउंड वाले भी हम। 
हमारी लिखी स्क्रिप्ट,
हमें ही सुनाती है जिंदगी। 
एक दिन में,
कई किरदार,
निभाती है जिंदगी,
"रंगमंच" है जिंदगी।   

Thursday, July 14, 2022

"महंगा सिलिंडर.."

मुफ्त राशन पाकर भी,
भूखा रह गया गरीब। 
महंगा सिलिंडर उससे,
अब खरीदा नहीं जाता। 

"इंद्रदेव जी.."

सोच रहा हूँ,
कल सुबह ११ बजे,
बारिश के विषय में,
एक ज्ञापन,
इंद्रदेव जी को,
दे ही दिया जाए। 
हमारे शहर से,
क्या नाराजगी है,
इसका भी तो,
पता किया जाए। 

"कीमत .."

ज़रूरत से ज्यादा समय,
जब कोई किसी को देता है। 
तब समय देने वाला शख्स,
अपनी कीमत खो देता है। 

Friday, July 1, 2022

"पहली बारिश.."

आज,
मौसम का,
पहला,
भीगा हुआ,
अखबार,
घर आया है। 
खैर मकदम !

मेरे शहर  में, 
इस मानसून की पहली बारिश।