Thursday, September 14, 2023

"गुमशुदा.."

गुमशुदा हूँ मैं कई बरसों से,
मिल जाऊं तो, घर छोड़ आना। 
#Poet_Shalabh_Gupta 

#उत्तरप्रदेश #गुजरात #महाराष्ट्र #उत्तराखण्ड 
#मुरादाबाद #सूरत #मुंबई #भीमताल #भवाली 

ज़िन्दगी यूँ ही चलती रहे !






"नई कवितायेँ .."

{१]
इन पहाड़ों की पगडंडियों पर,
कुछ दूर अकेले चलने दो मुझे। 
पुरानी डायरी के खाली पन्नों पर,
कुछ नई कवितायेँ लिखने दो मुझे। 

[२]
ढूंढ रहा हूँ खुद को बरसों से,
शयद आज कहीं मिल जाऊं मैं। 



Friday, September 1, 2023

"प्रिय सितम्बर.."

प्रिय सितम्बर !
कैसे हो तुम।
कहां रहे इतने दिन,
बहुत समय बाद,
मिले हो तुम।
चलो, घर चलो।
चाय साथ पियेंगे,
शिकवे शिकायत,
मिल कर दूर करेंगें।
कुछ कहना तुम बातें,
कुछ हम अपनी कहेंगे।

#poet_shalabh_gupta 




Friday, August 18, 2023

"भीमताल .."

भीमताल के प्रवास के समय....... 
सफर यूँ ही चलते रहें... 
हम बस यूँ ही लिखते रहें। 

[१]
हम समुन्दर का शहर,
छोड़ आये तो क्या ?
बादल बनकर सागर,
मुझसे मिलने आया है। 

[२]
इन पहाड़ों से मेरे रिश्ते बड़े पुराने हैं। 
सफर के रास्ते सारे  जाने पहचाने हैं। 

[३]
कभी नहीं लुभाये मुझे, वो सीधे साधे रास्ते। 
खुद के लिए चुने मैंने, पहाड़ों के सर्पीले रास्ते। 




"बारिश .."

अपनेपन का अहसास दे जाते हो,
ना जाने तुम कहाँ से आ जाते हो। 
कभी यादें कभी बारिश बनकर,
सफर में साथ निभाने आ जाते हो।  

Monday, March 20, 2023

"पूज्य पापा जी.."

पूज्य पापा जी की नवम पुण्य तिथि पर उनको श्रद्धा सुमन अर्पित। 
18 मार्च 2023

[१] 
कुछ देर के लिए ही सही, मैं बचपन में लौट जाऊं। 
आपकी ऊँगली थामकर, आज  मेले में घूम आऊं। 

[२]
यूँ तो आपकी दुआयें हमेशा साथ चलती हैं। 
भीड़ भरी सड़कों पर आप बहुत याद आते हैं। 

"ज़िन्दगी.."

 यह उन दिनों की बात है,
जब फुर्सत में थी ज़िन्दगी। 
अब तो खुद को देखे हुए,
एक ज़माना बीत गया। 

Saturday, March 11, 2023

"बातें ..."

मित्र मेरे जब तुम,
मुझसे मिलने आना। 
तो अपना मोबाइल,
घर छोड़ कर आना। 
करनी हैं आज तुमसे,
ढेर सारी बातें मुझे। 

Monday, March 6, 2023

"खुदगर्ज़.."

थोड़ा खुदगर्ज़ बन कर देखते हैं। 
खुद के लिए जी कर देखते हैं। 
कांधा, दर्द और आंसू भी अपने,
दिल को पत्थर कर के देखते हैं। 
अपने ग़मों को छुपा के देखते हैं। 
झूठ मूठ मुस्करा के देखते हैं। 

Wednesday, March 1, 2023

"लिमिटेड एडिशन.."

दुनिया का बदलता रुख देखकर,
अब हम लिमिटेड एडिशन हो गए। 
ज़िंदगी के बिखरे पन्नों को समेटकर,
अब हम ज़िल्द वाली किताब हो गए।