I am Shalabh Gupta from India. Poem writing is my passion. I think, these poems are few pages of my autobiography. My poems are my best friends.
Wednesday, March 28, 2018
Sunday, March 18, 2018
"चतुर्थ पुण्यतिथि पर.."
आज, पूज्य पापा जी की चतुर्थ पुण्यतिथि पर हम सभी उनको श्रद्धा सुमन अर्पित करते हैं। आपका आशीर्वाद और प्यार, हम सबको जीवन के कठिन पलों में भी धैर्य और हौसला बनाये रखने की शक्ति प्रदान कर रहा है।
घर अब खाली सा लगता है । घर में नहीं, अब मन लगता है ।
आपका जीवन दर्शन, हम सभी के लिए एक प्रेरणा है। आपको शत-शत नमन !
घर अब खाली सा लगता है । घर में नहीं, अब मन लगता है ।
Wednesday, March 7, 2018
Wednesday, February 21, 2018
ना जाने कहाँ खो गया "ईशान" हमारा...
उदय से पहले अस्त हो गया एक तारा,
ना जाने कहाँ खो गया "ईशान" हमारा ।
ना जाने कहाँ खो गया "ईशान" हमारा ।
लोरियां सुनाकर सुलाती थी जिसे,
चिरनिद्रा में सो गया माँ का राज दुलारा।
उसके दुख में डूब गया जहाँ सारा।
नन्हें परों से भी ऊंचाइयों तक उड़ा करता था।
बातों से ही सबको अपना बना लेता था,
ना जाने किसकी नज़र लग गयी उसको,
बेदर्द आंधी ने सफर ख़त्म किया सारा।
बेदर्द आंधी ने सफर ख़त्म किया सारा।
उसके दुख में डूब गया जहाँ सारा।
घर अब खाली सा लगता है ।
घर में नहीं, अब मन लगता है ।
ना जाने कैसी खामोशी है घर में ,
क्या हो गया यह कुछ ही दिन में ।
घर में नहीं, अब मन लगता है ।
ना जाने कैसी खामोशी है घर में ,
क्या हो गया यह कुछ ही दिन में ।
आँगन में लगे पेड़ों पर ,
अब चिड़ियाँ गुनगुनाती नहीं।
घर में लगे म्यूजिक सिस्टम को,
अब कोई भी बजाता नहीं।
कान्हा की बांसुरी कहीं गुम हो गई।
कान्हा की बांसुरी कहीं गुम हो गई।
उसके दुख में डूब गया जहाँ सारा।
चला गया है उस जहाँ में वो,
जहाँ से लौट कर आता नही कोई दोबारा।
चला गया है उस जहाँ में वो,
जहाँ से लौट कर आता नही कोई दोबारा।
जन्म : 17 मई 2003
अवसान : 9 फरवरी 2018
Thursday, February 1, 2018
Saturday, January 27, 2018
Tuesday, January 23, 2018
Monday, January 1, 2018
"कुछ तारीखें.."
यूँ तो ज़िन्दगी में,
कई कैलेंडर बदल गये।
कुछ तारीखें आज भी,
संभालकर रखी हैं मैंने।
@ शलभ गुप्ता
Sunday, December 31, 2017
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