Friday, April 29, 2022

"अपने रास्ते.."

भीड़ का हिस्सा मत बनो,
भेड़ों की तरह मत चलो। 
अपने रास्ते खुद तय करो,
चलना है तो अकेले चलो। 

Saturday, April 23, 2022

"कलर थीम"

आम आदमी की ज़िन्दगी में,
कहाँ कोई कलर थीम होती है। 
मटमैले रंगों से बनी "शलभ" की,
एक धुँधली सी तस्वीर होती है। 

Tuesday, April 12, 2022

"पलाश.."

ज़िन्दगी के सफर में,
दरख़्त मिल गए पलाश के। 
तुम मिले जैसे मुझे,
लम्हें ख़त्म हुए तलाश के। 


Tuesday, April 5, 2022

"समय.."

मिलना हो मुझसे तो,
समय निकाल कर आना। 
जाने की जल्दी हो तो,
फिर तुम मत आना।  

Thursday, March 31, 2022

"एक तस्वीर.."

ज़िन्दगी की एलबम,
B & W हो गई तो क्या। 
एक तस्वीर आज भी,
संभाल कर रखी है मैंने। 


"कभी कभी.."

कभी कभी,
तन्हाई भी ज़रूरी है,
खुद से खुद की,
बातें करने के लिए।  

Monday, March 28, 2022

"धूप.."

ज़िम्मेदारियाँ,
जीवन की,
कुछ इस तरह,
निभाईं मैंने। 
उसे बैठाकर,
ठंडी छाँव में,
खुद के लिए फिर,
धूप चुन ली मैंने।  

"दर्द .."

हर दर्द के पीछे,
अपने ही हों,
यह ज़रूरी तो नहीं है। 
कई बार,
हम खुद भी,
ज़िम्मेदार होते हैं। 


Tuesday, March 22, 2022

"आँखों का पानी .."

नदिया, पोखर, सागर,
तुम्हारी बातें,
अब हम किससे कहें। 
यहाँ तो,
लोगों की आँखों का,
पानी भी अब कम,
होने लगा है। 
(विश्व जल दिवस पर लिखी कुछ पंक्तियाँ)

Monday, March 21, 2022

"अबीर - गुलाल.."

दूर शहर में रहने वाले बच्चे,
जब त्यौहार पर घर आ जाते हैं। 
मां - पिता के लिए वो लम्हें,
खुशियों के अबीर - गुलाल हो जाते हैं।