Monday, March 20, 2023

"पूज्य पापा जी.."

पूज्य पापा जी की नवम पुण्य तिथि पर उनको श्रद्धा सुमन अर्पित। 
18 मार्च 2023

[१] 
कुछ देर के लिए ही सही, मैं बचपन में लौट जाऊं। 
आपकी ऊँगली थामकर, आज  मेले में घूम आऊं। 

[२]
यूँ तो आपकी दुआयें हमेशा साथ चलती हैं। 
भीड़ भरी सड़कों पर आप बहुत याद आते हैं। 

"ज़िन्दगी.."

 यह उन दिनों की बात है,
जब फुर्सत में थी ज़िन्दगी। 
अब तो खुद को देखे हुए,
एक ज़माना बीत गया। 

Saturday, March 11, 2023

"बातें ..."

मित्र मेरे जब तुम,
मुझसे मिलने आना। 
तो अपना मोबाइल,
घर छोड़ कर आना। 
करनी हैं आज तुमसे,
ढेर सारी बातें मुझे। 

Monday, March 6, 2023

"खुदगर्ज़.."

थोड़ा खुदगर्ज़ बन कर देखते हैं। 
खुद के लिए जी कर देखते हैं। 
कांधा, दर्द और आंसू भी अपने,
दिल को पत्थर कर के देखते हैं। 
अपने ग़मों को छुपा के देखते हैं। 
झूठ मूठ मुस्करा के देखते हैं। 

Wednesday, March 1, 2023

"लिमिटेड एडिशन.."

दुनिया का बदलता रुख देखकर,
अब हम लिमिटेड एडिशन हो गए। 
ज़िंदगी के बिखरे पन्नों को समेटकर,
अब हम ज़िल्द वाली किताब हो गए। 

Saturday, December 3, 2022

"खिली - खिली धूप.."

जाड़ों की खिली - खिली धूप से,
जी भर के बातें करने दो मुझे। 
रूठ जायेगी सर्द मौसम में फिर,
कई दिन नहीं आयेगी मिलने मुझे। 

Thursday, December 1, 2022

"मेरे हिस्से की धूप.."

चाहे कितना भी घना कोहरा सही, 
मेरे हिस्से की धूप मुझे मिलेगी ही। 

Tuesday, November 29, 2022

"जीवन के खाते.."

मिली हैं किश्तों में, अब मुझको साँसें। 
बहुत हो गईं अब, इस जमाने से बातें। 
संभालकर चलाने हैं, जीवन के खाते। 
खुद से करनी है अब, ढेर सारी  बातें। 

Thursday, November 24, 2022

"ऐ ज़िन्दगी.."

ऐ ज़िन्दगी, अब ज़रा हौले हौले चल। 
बरसों बाद, अब मिले सुकून के पल। 
अभी ठहर, संभल, फिर धीरे धीरे चल। 
बड़े एहतियात से, खर्च करना अब पल। 

Saturday, November 19, 2022

"साँसों की अहमियत..|

धीरे धीरे ही सही, ज़िन्दगी चलने लगी। 
गुनगुनी धूप अब, मन को भाने लगी। 
धड़कनों को मिली, एक नई संजीवनी। 
साँसों की अहमियत, समझ आने लगी।