
मुझे याद है तुम्हारा पहला ख़त,
जो तुमने मुझको लिखा था ।
मुझे याद है तुम्हारा दूसरा ख़त,
जो तुमने मुझको लिखा था।
इस तरह पाँच ख़त तुमने मुझको लिखे थे ।
सारे खतों में एक प्यारा सा अहसास था ,
सारे ख़त थे कोरे कागज ,
लिफाफे पर बस मेरा नाम था ।
फिर छठे ख़त में तीन शब्द लिख पाये तुम ।
"क्या चाकलेट खाओगे" मेरे साथ तुम ।
वो पहली चाकलेट जो हमने आधी-आधी खायी थी ।
वो चाकलेट पचास पैसे की आयी थी ।
अपनी गुल्लक से जो तुम लाई थी ।
उस चाकलेट का रैपर मैंने रख लिया था ।
कई ख़त मैंने भी तुमको लिखे,
पर सारे ख़त मेरे पास ही रहे ।
और वो आखरी ख़त ,
जो तुमने मुझको लिखा था ।
इस बार कोरा कागज नहीं था वह ,
जीवन का उसमें था सार लिखा,
प्रेम का सारा हाल लिखा।
ना मिल पायेगें हम,
यह बार-बार लिखा ।



