Saturday, November 16, 2024

"नई कविता"

वक्त की आपा धापी में,
जब नई कवितायेँ,
नहीं लिख पाता हूँ मैं। 
तब कमरे के कोने में लगी,
कानिस पर रखी हुई,
पुरानी कविताओं की,
डायरी पर जमी,
धूल की परतों को,
फिर से साफ करके,
उसी जगह रख देता हूँ मैं। 
और इस तरह,
बिना लिखे ही,
डायरी के बचे हुए,
कुछ कोरे पन्नों पर,
फिर से एक नई कविता,
लिख देता हूँ मैं। 

Tuesday, June 18, 2024

"मरुस्थल.."

बातों ही बातों के,
फूल खिलते थे जहाँ। 
खामोशियों के मरुस्थल,
रह गए अब वहाँ। 

Tuesday, May 21, 2024

"माँ .."

सुकून से सो जाते हैं, 
बच्चे रात में,
माँ का लोरी सुनाना, 
बहुत ज़रूरी है। 
संवर जाती है, 
जिंदगी बच्चों की,
घर में एक माँ, 
बहुत ज़रूरी है। 

(अंतरराष्ट्रीय मदर्स डे पर विशेष)

Friday, May 10, 2024

"मेहंदी.."

मेहंदी उसने हाथों में लगाई है,
और निखरे - निखरे हम हैं। 
फूल उसने गेसूओं में लगाए हैं,
और महके - महके हम हैं। 

Monday, March 25, 2024

"रंग कच्चे सारे.."

नकली बाज़ार के रंग कच्चे सारे,
फूल टेसू के अब कहाँ खिलते हैं। 
रंग से जो मन को इस दुनिया  में,
ऐसे लोग हमें अब कहाँ मिलते हैं। 

Monday, February 19, 2024

"संविदा.."

ज़िन्दगी की,
नौकरी में,
कुछ दर्द,
संविदा पर,
मिले थे मुझे। 
कुछ इस तरह,
मेरा साथ, 
भाने लगा उन्हें। 
धीरे धीरे,
वो दर्द सारे,
permanent हो गए। 
और छोड़कर अब,
जीते नहीं मुझे।  

Saturday, February 17, 2024

"व्हाट्सऐप स्टेटस.."

अब तुमसे,
बातें नहीं करता हूँ,
तो क्या। 
व्हाट्सऐप के,
स्टेटस पर,
गाने तो आज भी,
तुम्हारी पसंद के ही,
लगाता हूँ मैं। 
अकेले होकर भी,
तन्हा नहीं,
रहता हूँ मैं। 
पांच मिनट के,
उस गाने में फिर,
मीलों तुम्हारे संग,
चलता हूँ मैं। 

शेष फिर........ 

Tuesday, February 6, 2024

"अहमियत.."

वो हर दिन,
बहुत परेशां करता था मुझे। 
धीरे धीरे मैंने,
उसकी अहमियत ही,
कम कर दी ज़िंदगी से। 
मैं उसे भूलने लगा,
फिर सब ठीक होने लगा। 
अब मैं सुकूं से रहता हूँ,
और मेरा "दर्द" परेशां।  

Tuesday, December 26, 2023

"रिश्ते संभालते रहिये.."

कभी कभी अपनों से, 
मुलाकातें भी करते रहिये,
मिलना ना हो अगर, 
तो कभी कभी, 
बातें ही करते रहिये। 
और बातें ना हों अगर, 
तो मैसेज ही करते रहिये। 
रिश्ते सहेजते रहिये। 
और हाँ, कई दिनों से अगर,
बातें नहीं भी हुई तो क्या ?
कभी खुद भी कर लीजिये।
रिश्ते संभालते रहिये।
रिश्ते सहेजते रहिये। 
वर्ना अकेले रह जायेंगे। 

"बदलते रिश्ते .."

बहुत सारी बातें,
बातों में कहानियां,
कहानियों में,
आने वाले कल की,
फिर ढ़ेर सारी बातें।  
फिर ना जाने क्यों,
कब और कैसे ?
बातों से रह गए शब्द,
फिर शब्दों से, 
रह गए बस इमोजी। 
अब इमोजी से,
रह गया  only seen,
कितने बदल गए हम,
कितने सिमट गए हम।