Tuesday, November 21, 2017

"प्रेरणा.."

समाज की प्रेरणा बन रहा, 
आपका जीवन दर्शन।
सफलता के पुष्प कर रहे, 
आपका हार्दिक अभिनन्दन।
@ शलभ गुप्ता 

"जीत.."

आपकी जीत पर कुछ पंक्तियाँ लिखी हैं :
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"जीत" ने सीखा है, आपसे ही जीतना। 
सीखा नहीं आपने, ज़िन्दगी में हारना। 
आपकी जीत पर अनंत शुभकामनायें,
ज़िन्दगी हो या दौड़, सदा ही जीतना। 
@ शलभ गुप्ता

Wednesday, November 15, 2017

"खुशियों के फूल.."

घर से बहुत दूर, जब कोई अपने मिल जाते हैं ,
थकान से भरे चेहरे पर, खुशियों के फूल खिल जाते हैं। 

@ शलभ गुप्ता
(मेरी मुंबई यात्रा - 2 नवंबर 2017)


Sunday, November 12, 2017

"यादगार लम्हें.."

कभी-कभी ऐसे भी, मुस्कराते हैं लम्हें।
पुराने मित्रों से मुलाकात के यादगार लम्हें। 
सहेज कर रख लीजिये, यह खूबसूरत लम्हें। 
बिछुड़ने पर, फिर बहुत याद आते हैं लम्हें। 

@ शलभ गुप्ता

( मेरी सूरत यात्रा दिनांक : 3 नवंबर 2017 )


Saturday, November 11, 2017

"पृथ्वी थिएटर, मुंबई"

पृथ्वी थिएटर, मुंबई में अपने थिएटर के मित्र,
विलास कुंदकर और अमित सिंह के साथ एक यादगार तस्वीर।



Wednesday, October 25, 2017

"पत्थर दिल.."

अक्सर ना जाने क्या टूटता है मुझमें ,
लोग तो कहते हैं पत्थर दिल है मेरा !
@ Shalabh Gupta

Friday, October 20, 2017

"दीप.."

बनावटी रोशनियों की चकाचोंध में,
कुछ भी दिखाई नहीं देता,
प्रेम का एक ही दीप काफी है,
उम्र भर रौशनी देने के लिये।
@ शलभ गुप्ता

"मिठास .."

उस मिठाई में कोई  मिठास नहीं होती ,
जो माँ के हाथों से बनी नहीं होती।  
@ शलभ गुप्ता 

Sunday, October 1, 2017

"सच्चे जज्बात.."

यूँ तो दुनिया देखी हैं हमने, हज़ारों लोगों से मिले हैं।
सच्चे जज्बात , बस बुजुर्गों की दुआओं में मिले हैं।

@ शलभ गुप्ता
(अंतरराष्ट्रीय वृद्ध दिवस पर)

"घर का आँगन.."

प्रत्येक घर में आपका सदा निवास रहे।
खुशियों से परिपूर्ण सबका आवास रहे।
आपका आगमन परम सौभाग्य हमारा,
तुलसी से सुगन्धित सबका आँगन रहे।

@ शलभ गुप्ता (1 अक्टूबर 2017)