Wednesday, February 21, 2018

ना जाने कहाँ खो गया "ईशान" हमारा...

उदय से पहले अस्त हो गया एक तारा,
ना जाने कहाँ खो गया "ईशान" हमारा ।
लोरियां सुनाकर  सुलाती थी जिसे,
चिरनिद्रा में सो गया माँ का राज दुलारा।  
उसके दुख में डूब गया जहाँ सारा।
नन्हें परों से भी ऊंचाइयों तक उड़ा करता था। 
बातों से ही सबको अपना बना लेता था,    
ना जाने किसकी नज़र लग गयी उसको,
बेदर्द आंधी ने सफर ख़त्म किया सारा।
उसके दुख में डूब गया जहाँ सारा।
घर अब खाली सा लगता है ।
घर में नहीं, अब मन लगता है ।
ना जाने कैसी खामोशी है घर में ,
क्या हो गया यह कुछ ही दिन में ।
आँगन में लगे पेड़ों पर ,
अब चिड़ियाँ गुनगुनाती नहीं। 
घर में लगे म्यूजिक सिस्टम को,
अब कोई भी बजाता नहीं। 
कान्हा की बांसुरी कहीं गुम हो गई।
उसके दुख में डूब गया जहाँ सारा।
चला गया है उस जहाँ में वो,
जहाँ से लौट कर आता नही कोई दोबारा।

जन्म : 17 मई 2003 
अवसान : 9 फरवरी 2018 




Thursday, February 1, 2018

"नाटक और रंगमंच"

"नाटक और रंगमंच" से जुडी कुछ रोचक बातें !! 
इंटरनेट से प्राप्त जानकारी और थिएटर के अपने कुछ अनुभवों को, 
इस लेख के माध्यम से आप सब के साथ साझा करना चाहता हूँ। 

("कौतुहल" राष्ट्रीय हिंदी मासिक पत्रिका के जनवरी 2018 के अंक में प्रकाशित) 




  

Saturday, January 27, 2018

"गणतंत्र दिवस"

राष्ट्रीय पर्व "गणतंत्र दिवस" के उपलक्ष पर, महाराजा हरिशचंद्र महाविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में काव्य पाठ करते हुए।



Tuesday, January 23, 2018

"26 नवम्बर"

"कौतुहल" राष्ट्रीय हिंदी मासिक पत्रिका, नवम्बर 2017 के अंक में ,
 प्रकाशित मेरी एक कविता हुई, जिसका शीर्षक है "26 नवम्बर".
आशा करता हूँ, आप सबको भी कविता पसंद आएगी..
सम्पादक महोदय को एक बार फिर से धन्यवाद !




Monday, January 1, 2018

"कुछ तारीखें.."

यूँ तो ज़िन्दगी में,
कई कैलेंडर बदल गये। 
कुछ तारीखें आज भी,
संभालकर रखी हैं मैंने। 
@ शलभ गुप्ता 

कैलेंडर-2018

चलो आज कुछ तो बदला है ,
ज़िन्दगी नहीं तो कैलेंडर ही सही। 
@ शलभ गुप्ता 

Sunday, December 31, 2017

"अलविदा 2017"

पुराने कैलेंडर से गले मिलकर ,
आज बहुत रोईं घर की दीवारें। 

अलविदा 2017
@ शलभ गुप्ता 

Wednesday, December 13, 2017

"घुटन.."

"आँसू" हो या "बारिशें",
बरस जाएँ तो ही अच्छा है,
वरना घुटन बहुत हो जाती है,
दिल में हो या फिर मौसम में..
@ शलभ गुप्ता 

Sunday, December 10, 2017

"मित्र"

"कौतुहल" राष्ट्रीय हिंदी मासिक पत्रिका, October 2017 के अंक में भी,
मेरी एक और कविता प्रकाशित हुई, जिसका शीर्षक है "मित्र".
आशा करता हूँ, आप सबको भी कविता पसंद आएगी.. 
सम्पादक महोदय को एक बार फिर से धन्यवाद !


Saturday, December 9, 2017

पत्रिका "कौतुहल" में, प्रकाशित मेरी कविता "मित्र".

राष्ट्रीय हिंदी मासिक पत्रिका "कौतुहल" के October 2017 के अंक में,
प्रकाशित मेरी एक और कविता, जिसका शीर्षक है "मित्र".
सम्पादक महोदय का हृदय से आभार !