Thursday, April 19, 2018

"बचपन के दिन.."

“बच्चे नहीं जानते ,
कि बच्चे क्या होते हैं ।
चोट उनको लगे ,
अहसास दर्द के हम को होते हैं ।
दर्द अपना छुपा कर ,
उनको फिर समझाते हैं .
मुझको अब अपने ,
बचपन के दिन याद आते हैं ।
@ शलभ गुप्ता 

Wednesday, March 28, 2018

मेरी एक कविता "माँ" !

"कौतुहल" राष्ट्रीय हिंदी मासिक पत्रिका के मार्च 2018,
के अंक में प्रकाशित मेरी एक कविता "माँ" ! 
माँ , एक बार फिर से मुझको ,
लोरी सुनाकर , सुला जाना। 
(शलभ गुप्ता)



Sunday, March 18, 2018

"चतुर्थ पुण्यतिथि पर.."

आज, पूज्य पापा जी की चतुर्थ पुण्यतिथि पर हम सभी उनको श्रद्धा सुमन अर्पित करते हैं।  आपका आशीर्वाद और प्यार, हम सबको जीवन के कठिन पलों में भी धैर्य और हौसला बनाये रखने की शक्ति प्रदान कर रहा है।
आपका जीवन दर्शन, हम सभी के लिए एक प्रेरणा है। आपको शत-शत नमन ! 

घर अब खाली सा लगता है । घर में नहीं, अब मन लगता है ।




Wednesday, March 7, 2018

मेरे मन की बात: पंछियों के साथ - फरवरी 2018

"कौतुहल" राष्ट्रीय हिंदी मासिक पत्रिका के फरवरी 2018 के अंक में प्रकाशित,
 मेरे मन की बात: पंछियों के साथ। 



 

Wednesday, February 21, 2018

ना जाने कहाँ खो गया "ईशान" हमारा...

उदय से पहले अस्त हो गया एक तारा,
ना जाने कहाँ खो गया "ईशान" हमारा ।
लोरियां सुनाकर  सुलाती थी जिसे,
चिरनिद्रा में सो गया माँ का राज दुलारा।  
उसके दुख में डूब गया जहाँ सारा।
नन्हें परों से भी ऊंचाइयों तक उड़ा करता था। 
बातों से ही सबको अपना बना लेता था,    
ना जाने किसकी नज़र लग गयी उसको,
बेदर्द आंधी ने सफर ख़त्म किया सारा।
उसके दुख में डूब गया जहाँ सारा।
घर अब खाली सा लगता है ।
घर में नहीं, अब मन लगता है ।
ना जाने कैसी खामोशी है घर में ,
क्या हो गया यह कुछ ही दिन में ।
आँगन में लगे पेड़ों पर ,
अब चिड़ियाँ गुनगुनाती नहीं। 
घर में लगे म्यूजिक सिस्टम को,
अब कोई भी बजाता नहीं। 
कान्हा की बांसुरी कहीं गुम हो गई।
उसके दुख में डूब गया जहाँ सारा।
चला गया है उस जहाँ में वो,
जहाँ से लौट कर आता नही कोई दोबारा।

जन्म : 17 मई 2003 
अवसान : 9 फरवरी 2018 




Thursday, February 1, 2018

"नाटक और रंगमंच"

"नाटक और रंगमंच" से जुडी कुछ रोचक बातें !! 
इंटरनेट से प्राप्त जानकारी और थिएटर के अपने कुछ अनुभवों को, 
इस लेख के माध्यम से आप सब के साथ साझा करना चाहता हूँ। 

("कौतुहल" राष्ट्रीय हिंदी मासिक पत्रिका के जनवरी 2018 के अंक में प्रकाशित) 




  

Saturday, January 27, 2018

"गणतंत्र दिवस"

राष्ट्रीय पर्व "गणतंत्र दिवस" के उपलक्ष पर, महाराजा हरिशचंद्र महाविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में काव्य पाठ करते हुए।



Tuesday, January 23, 2018

"26 नवम्बर"

"कौतुहल" राष्ट्रीय हिंदी मासिक पत्रिका, नवम्बर 2017 के अंक में ,
 प्रकाशित मेरी एक कविता हुई, जिसका शीर्षक है "26 नवम्बर".
आशा करता हूँ, आप सबको भी कविता पसंद आएगी..
सम्पादक महोदय को एक बार फिर से धन्यवाद !




Monday, January 1, 2018

"कुछ तारीखें.."

यूँ तो ज़िन्दगी में,
कई कैलेंडर बदल गये। 
कुछ तारीखें आज भी,
संभालकर रखी हैं मैंने। 
@ शलभ गुप्ता 

कैलेंडर-2018

चलो आज कुछ तो बदला है ,
ज़िन्दगी नहीं तो कैलेंडर ही सही। 
@ शलभ गुप्ता