Wednesday, December 13, 2017

"घुटन.."

"आँसू" हो या "बारिशें",
बरस जाएँ तो ही अच्छा है,
वरना घुटन बहुत हो जाती है,
दिल में हो या फिर मौसम में..
@ शलभ गुप्ता 

Sunday, December 10, 2017

"मित्र"

"कौतुहल" राष्ट्रीय हिंदी मासिक पत्रिका, October 2017 के अंक में भी,
मेरी एक और कविता प्रकाशित हुई, जिसका शीर्षक है "मित्र".
आशा करता हूँ, आप सबको भी कविता पसंद आएगी.. 
सम्पादक महोदय को एक बार फिर से धन्यवाद !


Saturday, December 9, 2017

पत्रिका "कौतुहल" में, प्रकाशित मेरी कविता "मित्र".

राष्ट्रीय हिंदी मासिक पत्रिका "कौतुहल" के October 2017 के अंक में,
प्रकाशित मेरी एक और कविता, जिसका शीर्षक है "मित्र".
सम्पादक महोदय का हृदय से आभार !

 


"जख्म"

जख्म पुराने अब भर गये सारे। 
ऐ-दिल, ढूंढ ले अब कोई दर्द नया। 

@ शलभ गुप्ता 

Wednesday, November 29, 2017

पत्रिका "कौतुहल" में, प्रकाशित मेरी कविता "मेरी प्रिय मंजरी"

राष्ट्रीय हिंदी मासिक पत्रिका "कौतुहल" के सितम्बर माह के अंक में,
प्रकाशित मेरी एक कविता "मेरी प्रिय मंजरी"..
सम्पादक महोदय का हृदय से आभार !   





Tuesday, November 21, 2017

"प्रेरणा.."

समाज की प्रेरणा बन रहा, 
आपका जीवन दर्शन।
सफलता के पुष्प कर रहे, 
आपका हार्दिक अभिनन्दन।
@ शलभ गुप्ता 

"जीत.."

आपकी जीत पर कुछ पंक्तियाँ लिखी हैं :
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"जीत" ने सीखा है, आपसे ही जीतना। 
सीखा नहीं आपने, ज़िन्दगी में हारना। 
आपकी जीत पर अनंत शुभकामनायें,
ज़िन्दगी हो या दौड़, सदा ही जीतना। 
@ शलभ गुप्ता

Wednesday, November 15, 2017

"खुशियों के फूल.."

घर से बहुत दूर, जब कोई अपने मिल जाते हैं ,
थकान से भरे चेहरे पर, खुशियों के फूल खिल जाते हैं। 

@ शलभ गुप्ता
(मेरी मुंबई यात्रा - 2 नवंबर 2017)


Sunday, November 12, 2017

"यादगार लम्हें.."

कभी-कभी ऐसे भी, मुस्कराते हैं लम्हें।
पुराने मित्रों से मुलाकात के यादगार लम्हें। 
सहेज कर रख लीजिये, यह खूबसूरत लम्हें। 
बिछुड़ने पर, फिर बहुत याद आते हैं लम्हें। 

@ शलभ गुप्ता

( मेरी सूरत यात्रा दिनांक : 3 नवंबर 2017 )


Saturday, November 11, 2017

"पृथ्वी थिएटर, मुंबई"

पृथ्वी थिएटर, मुंबई में अपने थिएटर के मित्र,
विलास कुंदकर और अमित सिंह के साथ एक यादगार तस्वीर।