Sunday, June 25, 2017

"चाँद" मेरे..

आज देर से आयेगा,"चाँद" आसमान में,
"चाँद" मेरे, तुम ही जल्दी घर आ जाना !!

@ शलभ गुप्ता 

"चाँद.."

कल कह दिया था चाँद ने,
थोड़ी देर से आऊंगा आज !!

@ Shalabh Gupta

Saturday, June 24, 2017

"अजनबी के नाम.."

चर्चगेट से आती हुई,
आखिरी लोकल ट्रेन  की तरह,
खाली-खाली सी शाम हो गयी।
शोर मचातीं आतीं लहरें ,
पत्थरों से टकराकर,
गुमनाम हो गयीं।
घर के एक कोने में रखी,
रंग-बिरंगी छतरियाँ भी ;
बारिशों के ना आने से,
परेशान हो गयीं।
मिलना ना होगा जिनसे कभी,
ज़िन्दगी "शलभ" की ,
उसी अजनबी के नाम हो गयी।
@ शलभ गुप्ता "राज"

Thursday, June 22, 2017

"सौगात.."

आँसू नहीं अनमोल  मोती हैं यह, 
अपनों की दी हुई सौगात है यह।  

"बरसात.."

जब भी खुद से मुलाकात हुई ,
आंसुओं की खूब बरसात हुई। 

"तन्हाई .."

तन्हाई में भी अकेले कहाँ हम,
यादों का आंसुओं संग साथ है।  

"घुटन.."

"आँसू" हो या "बारिशें" ,
बरस जाएँ तो ही अच्छा है ,
वरना  घुटन बहुत हो जाती है,
दिल में हो या फिर मौसम में. 
 @ शलभ गुप्ता

Tuesday, June 20, 2017

"लिखना है कुछ ख़ास सा..."

डायरी के कुछ पन्ने भरे हैं।
कुछ पन्नों के कोने मुड़े हैं,
और बहुत से अभी कोरे हैं।
लिखना है  कुछ ख़ास सा।
पहले प्यार के एहसास सा।
अमलतास के फूल ;
मुंबई की बारिशें,
घर लौटते पंछी ,
और ईद के चाँद सा।
लिखना है कुछ ख़ास सा।
@ शलभ गुप्ता 

Thursday, June 15, 2017

"चिठ्ठी..."

घर से चिठ्ठी आयी है।
हिचकियाँ संग लायी है।
भीगे कागज में लिपटी हुई,
अपनों की याद आयी है।
@ शलभ गुप्ता 

Wednesday, June 14, 2017

"मुंबई की बारिशें.."

मुंबई की बारिशें,
कर रहीं मेरा इंतज़ार।
जल्द ही आयेगें हम,
भीगने  फिर एक  बार।  

Monday, June 12, 2017

"शिकायत.."

जल्दी ही आपसे मुलाकात होगी,
दूर ये आपकी शिकायत होगी।


"मौसम..."

यादों का भी एक मौसम होना चाहिये ,
दिल को भी तो  थोड़ा आराम चाहिये।  

Tuesday, June 6, 2017

जन्मदिन की शुभकामनायें - 6 जून 2017

ज़िन्दगी की तेज़ तपन में,
अपनेपन की छाँव मिले।
उम्र के हर मोड़ पर,
ख़ुशियाँ बेमिसाल मिलें।
तितलियों को उड़ने के लिये,
नये- नये आसमान मिलें।
सुख और समृद्धि हमेशा,
आपके घर-आँगन में मिले।
मिलेंगे शायद, फिर किसी दिन;
संग-संग  हैं यादों के काफिले।
गीत - कविता लिखते रहें हम,
महकते रहें बातों  के सिलसिले।
(शलभ गुप्ता "राज")


Monday, June 5, 2017

"तेज़ धूप.."

ज़िन्दगी  की तेज़ धूप ,
तपती रेत पर नंगे पैर,
और ये मीलों का सफर,
बस चलते जाना है।
(शलभ गुप्ता )  

Wednesday, April 26, 2017

"जुगनू.."

यादों की गठरी लिये,
यह लम्बा सफर,
रात के मुसाफिर,
जुगनू हैं हम,
आंसू बनकर;
आँखों में झिलमिलायेगें, 
तुमको बहुत याद आयेंगें।  
( शलभ गुप्ता )

Saturday, April 15, 2017

"किताब.."


मेरे दिल ने भी चाहा था कई बार,
अपनी कविताओं को एक नाम दूँ मैं।
उदास शब्दों को एक मुस्कराहट दूँ मैं।
तुम आये ज़िन्दगी में बनकर प्यार ,
तुम्हें ही पढ़ा, तुम्हें ही लिखा मैंने ,
हरेक पन्ने पर कई-कई बार।  
वक्त की आंधियां चली कुछ इस तरह,
"शब्द" सारे, ना जाने कहाँ खो गये।
मेरे हाथों में बस कोरे पन्ने ही रह गये।
हम, अपनी किताब लिखने से रह गये।
(शलभ गुप्ता "राज")

Wednesday, April 12, 2017

"दास्ताँ.."
















समुन्दर किनारे बैठकर , लहरों से बातें की बहुत ।
सांझ ढले अपने घर जाता सूरज, लौटते पंछी याद आये बहुत ।
बातें थी कुछ ख़ास दिल में ही रहीं, कहनी थी जो उनसे बहुत ।
खुद से करते रहे हम बातें, कभी रोये कभी मुस्कराये बहुत ।
कालेज के दिन, कैंटीन और "दोस्त" याद आये बहुत ।
दिल के बागवां से, यादों के फूल समेट लाये बहुत ।
आज भी आती है , उन फूलों से खुशबू बहुत ।
तितलियाँ, फूल और यादें , मेरे जीने के लिए हैं बहुत ।
और क्या कहें अब जाने दो , दास्ताँ यह लम्बी है बहुत ।

(शलभ गुप्ता "राज")

Saturday, April 8, 2017

"बेटी.."

[१]
"बेटी" सिर्फ एक शब्द नहीं,
खुशियों का पावन नाम है ।
उससे ही है पूजा-आरती,
वह घर तीरथ-धाम है ।
[२]
तुलसी का पौधा ज़रूरी नहीं,
जहाँ बेटी का जन्म हो जाता है ।
जिस घर में होती है "बेटी",
वह घर मंदिर हो जाता है । 

(शलभ गुप्ता)

Thursday, March 23, 2017

"अपने दिल की भी सुना करो ..."

कभी-कभी अपने दिल की भी सुना करो ।
मन की तितलियों को उड़ने दिया करो ।
ये माना काम में बहुत मसरूफ हो मगर,
कभी-कभी कुछ लम्हे खुद को भी दिया करो ।
बारिशों के मौसम में भी भीगा करो।
उदास ज़िन्दगी में इन्द्रधनुषी रंग भरा करो ।
कभी-कभी खुल कर भी हँसा करो ।
तितलियों को किताबों में मत रखा करो।
उनके संग-संग आसमां में उड़ा करो।
कभी-कभी अपने दिल की भी सुना करो।

(कुछ वर्ष पूर्व लिखी हुई एक कविता )
-  शलभ गुप्ता "राज"

Friday, March 10, 2017

"रंग.."

मेरी ज़िन्दगी के रंग,
इंद्रधनुषी नहीं तो क्या,
मटमैले तो हैं।  

Wednesday, March 8, 2017

"Banganga Tank.."

Banganga Tank is an ancient water tank which is part of the Walkeshwar 
Temple Complex in Malabar Hill area of Mumbai in India. 
I love this place very much, I wrote many poems here. 

Friday, March 3, 2017

"नये सफर.."

यादों के सहारे कब तक जिया जायेगा ,
चल उठ, अब फिर से जिया जायेगा।
कल की गठरी को मन से उतार,
अब नये सफर पर चला जायेगा।
तमाम उम्र झुलसती रही ज़िन्दगी,
अब के बारिशों में खूब भीगा जायेगा।
भीड़ में भी तन्हा ही चलते रहे "शलभ",
अब किसी को हमराह बनाया जायेगा।
© Shalabh Gupta
11 April 2016

Monday, February 27, 2017

"अधूरे गीत.."

कई गीत आज भी अधूरे हैं,
डायरी के कई पन्ने कोरे हैं,
समझ ना पाए शब्दों को तुम,
गीत वो पूरे होकर भी अधूरे हैं।


"नये इन्द्रधनुष.."

आशाओं के नये इन्द्रधनुष बने,
आप सबकी दुआ रंग लायी है ,
साज के टूटे तारों को जोड़कर ,
फिर धुन एक नयी सजायी है .

Thursday, February 23, 2017

"ठहरी हुई चाँदनी..."

धीरे-धीरे ही सही,
फिर से चलने लगी है.
तेरा शुक्रिया "ऐ ज़िन्दगी",
जैसे घर के आँगन में,
मुंडेर पर ठहरी हुई चाँदनी,
रौशनी बिखेरने लगी है।
(शलभ गुप्ता "राज")


Saturday, February 18, 2017

"एक कविता.."


बहुत दिन हुए,
तुमसे मिले हुए ,
दिल की बातें किये हुए .
तुम पर,
एक कविता लिखे हुए ।

(शलभ गुप्ता "राज")

Monday, January 2, 2017

"नया साल.."

पुरानी दीवारों को नया कैलेंडर मुबारक हो,
आप सभी को नया साल मुबारक हो।


"मंज़िल.."

वह  रास्ते  ही क्या  जिसमे मोड़ ना हो,
वह मंज़िल  ही क्या जो दूर ना हो।