Sunday, July 3, 2011

"पापा, जल्दी घर आ जाना ..."


परिवार को छोड़कर दूसरे शहर जाना ।
बच्चों का, छज्जे से हौले-हौले हाथ हिलाना।
और कहना "पापा, जल्दी घर आ जाना ।
बहुत मुश्किल होता है, आंसुओं को रोक पाना ।

6 comments:

  1. भावुक करने वाली पंक्तियां....

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  2. @ Darshan Kaur Ji : Jo Mehsoos Kiya Hai...Usi Ahsaas Ko Likhne Ki Koshish Ki Hai...

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  3. @ Veena Ji : Zindagi Har Roz Ek Naya Sawaal Lekar Aati Hai, Pardes Me Ghar Ki Bahut Yaad Aati hai...

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  4. आप का बलाँग मूझे पढ कर आच्चछा लगा , मैं बी एक बलाँग खोली हू
    लिकं हैhttp://sarapyar.blogspot.com/

    मै नइ हु आप सब का सपोट chheya
    joint my follower

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  5. @ Vidhya Ji : Aapka Swagat Hai Blog Parivaar Me...Meri Shubhkaamnayen...

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