Wednesday, February 21, 2018

ना जाने कहाँ खो गया "ईशान" हमारा...

उदय से पहले अस्त हो गया एक तारा,
ना जाने कहाँ खो गया "ईशान" हमारा ।
लोरियां सुनाकर  सुलाती थी जिसे,
चिरनिद्रा में सो गया माँ का राज दुलारा।  
उसके दुख में डूब गया जहाँ सारा।
नन्हें परों से भी ऊंचाइयों तक उड़ा करता था। 
बातों से ही सबको अपना बना लेता था,    
ना जाने किसकी नज़र लग गयी उसको,
बेदर्द आंधी ने सफर ख़त्म किया सारा।
उसके दुख में डूब गया जहाँ सारा।
घर अब खाली सा लगता है ।
घर में नहीं, अब मन लगता है ।
ना जाने कैसी खामोशी है घर में ,
क्या हो गया यह कुछ ही दिन में ।
आँगन में लगे पेड़ों पर ,
अब चिड़ियाँ गुनगुनाती नहीं। 
घर में लगे म्यूजिक सिस्टम को,
अब कोई भी बजाता नहीं। 
कान्हा की बांसुरी कहीं गुम हो गई।
उसके दुख में डूब गया जहाँ सारा।
चला गया है उस जहाँ में वो,
जहाँ से लौट कर आता नही कोई दोबारा।

जन्म : 17 मई 2003 
अवसान : 9 फरवरी 2018 




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