Thursday, October 5, 2023

"सच्चे दोस्त.."

इस मतलबी दुनिया में,
झूठे हैं सब रिश्ते सारे। 
सच कहते हो "शलभ",
बेजुबां हैं सच्चे दोस्त हमारे। 



Monday, October 2, 2023

"अनुवाद.."

सरल है बहुत किसी के,
शब्दों का अनुवाद करना। 
ख़ामोशी को समझना "शलभ",
हर किसी के बस की बात नहीं। 

विगत ३० सितम्बर को अनुवाद दिवस था,
तब यह पंक्तियों का सृजन हुआ। 

Monday, September 25, 2023

"दिल की बात.."

मतलबी दुनिया में अब,
किससे बात की जाए।
छज्जे पर रखे पौधों से,
दिल की बात की जाए।
#poet_shalabh_gupta #मतलबी #दुनिया #दिल #बात #पौधे #घर


Thursday, September 21, 2023

"दिल मेरा.."

जब से Stent पड़ें हैं मेरे सीने में,
दिल मेरा बहुत Stunt करता है। 
दिमाग कहता है जरा "हौले चलना",
कमबख्त और तेजी से धड़कता है। 

#पोएट_शलभ_गुप्ता 

"श्री गणेश चतुर्थी.."

बस यही कामना प्रभु आपसे,
इस बार सबके घर जाना। 
उनके आँगन में खुशियों के,
हरसिंगार सजाकर आना। 

आप सभी को श्री गणेश चतुर्थी की हार्दिक मंगलकामनाएं. 


Thursday, September 14, 2023

"गुमशुदा.."

गुमशुदा हूँ मैं कई बरसों से,
मिल जाऊं तो, घर छोड़ आना। 
#Poet_Shalabh_Gupta 

#उत्तरप्रदेश #गुजरात #महाराष्ट्र #उत्तराखण्ड 
#मुरादाबाद #सूरत #मुंबई #भीमताल #भवाली 

ज़िन्दगी यूँ ही चलती रहे !






"नई कवितायेँ .."

{१]
इन पहाड़ों की पगडंडियों पर,
कुछ दूर अकेले चलने दो मुझे। 
पुरानी डायरी के खाली पन्नों पर,
कुछ नई कवितायेँ लिखने दो मुझे। 

[२]
ढूंढ रहा हूँ खुद को बरसों से,
शयद आज कहीं मिल जाऊं मैं। 



Friday, September 1, 2023

"प्रिय सितम्बर.."

प्रिय सितम्बर !
कैसे हो तुम।
कहां रहे इतने दिन,
बहुत समय बाद,
मिले हो तुम।
चलो, घर चलो।
चाय साथ पियेंगे,
शिकवे शिकायत,
मिल कर दूर करेंगें।
कुछ कहना तुम बातें,
कुछ हम अपनी कहेंगे।

#poet_shalabh_gupta 




Friday, August 18, 2023

"भीमताल .."

भीमताल के प्रवास के समय....... 
सफर यूँ ही चलते रहें... 
हम बस यूँ ही लिखते रहें। 

[१]
हम समुन्दर का शहर,
छोड़ आये तो क्या ?
बादल बनकर सागर,
मुझसे मिलने आया है। 

[२]
इन पहाड़ों से मेरे रिश्ते बड़े पुराने हैं। 
सफर के रास्ते सारे  जाने पहचाने हैं। 

[३]
कभी नहीं लुभाये मुझे, वो सीधे साधे रास्ते। 
खुद के लिए चुने मैंने, पहाड़ों के सर्पीले रास्ते। 




"बारिश .."

अपनेपन का अहसास दे जाते हो,
ना जाने तुम कहाँ से आ जाते हो। 
कभी यादें कभी बारिश बनकर,
सफर में साथ निभाने आ जाते हो।