
दर्द का अहसास कहाँ हो पाता है ,
दर्द हुए बिना..........
रिश्तों का अहसास कहाँ हो पाता है ,
अकेले हुए बिना............
समय का अहसास कहाँ हो पाता है,
समय खोये हुए बिना.....
मंजिल का अहसास कहाँ हो पाता है ,
रास्ता भटके हुए बिना......
I am Shalabh Gupta from India. Poem writing is my passion. I think, these poems are few pages of my autobiography. My poems are my best friends.