Thursday, July 22, 2010

"निष्काम कर्मयोग की जागृत हो भावनायें ..."

जीवन में किसी को , ना कोई कष्ट पहुँचाये ।
पीर परायी जब अपनी बन जाये ।
निष्काम कर्मयोग की जागृत हो भावनायें ।
"प्रेम" और "त्याग" की अंकुरित हो संवेदनायें ।
मेरी नज़र में वही बस "सच्चा कर्म" कहलाये।
आओ, हम सब मिल कर इस धरती को स्वर्ग बनायें ।

3 comments:

  1. पोस्ट पढ़कर अच्छा लगा

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  2. @ Jandunia: aapka hraday se abhaar...

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  3. आमीन ... ये धरती स्वर्ग हम सब मिल कर ही बना सकते हैं ....

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