थोड़ी देर के लिए ही सही,
बारिश बन कर आ जाओ,
तुम मेरे आँगन में।
बरस जाओ,
दिल के हर कोनों में।
महक जाओ,
घर के सारे बंद कमरों में।
I am Shalabh Gupta from India. Poem writing is my passion. I think, these poems are few pages of my autobiography. My poems are my best friends.
[१]
खुली किताब की तरह है जीवन मेरा।
मोबाइल भी तो लॉक नहीं रहता मेरा।
[२]
हमने तो बस स्टेटस ही बदले।
और उसने बदल लिए रास्ते।