Friday, June 17, 2011

"पहले जैसे इन्द्रधनुष , अब बनते नहीं हैं...."



ऐसा नहीं कि , बूंदों से मुझे प्यार नहीं है।
अब की बारिशों पर , मुझे ऐतबार नहीं हैं।
आती हैं घटायें , किसी अजनबी की तरह।
पहले की तरह अब बरसती नहीं हैं।
पहले जैसे इन्द्रधनुष , अब बनते नहीं हैं।
बूंदों में अब, अपने पन का अहसास नहीं हैं।
ऐसा नहीं कि , बूंदों से मुझे प्यार नहीं है।
अब की बारिशों पर , मुझे ऐतबार नहीं हैं।
बदल गया है वक्त बदल गया ज़माना ,
खुले मन से अब "दोस्त" मिलते नहीं हैं ।
पहले जैसे इन्द्रधनुष , अब बनते नहीं हैं ।

4 comments:

  1. सुंदर पंक्तियां...

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  2. ऐसा नहीं कि , बूंदों से मुझे प्यार नहीं है।... very touching lines....

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  3. @ Veena Ji: Aapka Shukriya, Aapko Yeh Poem Pasand Aayi..

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  4. @ Sushma Ji: शायद "बूंदों" की भी कुछ मजबूरियाँ हैं ....आपको कविता पसंद आई ..आपका बहुत-बहुत शुक्रिया....

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