Tuesday, February 11, 2014

"खुशबू..."

रूप बदल-बदलकर मुझसे मिलने आता है,
वो शख्स मुझसे ना जाने क्या चाहता है ?
जब भी उससे पूछा उसके आने का सबब,
बस खुशबू की तरह सांसों में घुल जाता है .
( शलभ गुप्ता "राज")

1 comment:

  1. प्रभावशाली प्रस्तुती....

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