Saturday, October 22, 2016

"निः शब्द..."

ऐ वक्त मेरे , तू बार-बार,
मेरा इम्तहान क्यों लेता है।
लिखने बैठता हूँ जब भी मगर,
मुझे निः शब्द कर देता है।



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