Saturday, May 7, 2011

"तन्हा ही यह सफर तय किया हमने..."

जो मंजिल पर कभी पहुँच नही सकते ,
उन रास्तों पर ही कदम रखे हमने ।
जो पूरे हो नही सकते ,
ख्वाब वही देखे हमने ।
जो हम सुना नही सकते ,
गीत वही लिखे हमने ।
और जब दिल को लगी प्यास ,
ख़ुद के आंसू पीये हमने।
जो मंजिल पर कभी पहुँच नही सकते ,
उन रास्तों पर ही कदम रखे हमने।
खुदा बाँट रहा था जब खुशियाँ लोगों को,
नाम उसमे अपना नही लिखाया हमने ।
चंचल हवाओं ने हाथ पकड़ा तो बहुत था ,
फूलों के चमन में,खुशबुओं का मेला तो बहुत था
फिर भी कुछ गिला नहीं तुझसे मेरी जिंदगी ,
तन्हा ही यह सफर तय किया हमने ।

4 comments:

  1. और जब दिल को लगी प्यास ,
    ख़ुद के आंसू पीये हमने।

    udas kar gayee.....hatash hona theek nahee...sahee mod par par laee ja saktee hai jindagee.......
    shubhkamnae

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  2. @ Apanatva Ji :
    हम कोशिश करेगें फिर से मुस्कराने की ,
    मगर लगता नहीं कि मुस्करा पायेगें ।

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  3. @ अरुण साथी :
    जब बात दिल के अहसास की होती है ,
    वह बात बहुत ख़ास होती है.....
    हर बात पर छलक जाते है आंसू,
    अपनी ज़िन्दगी की अब शाम होती है...

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