Monday, November 22, 2010

"चेहरे की उड़ी- उड़ी रंगत , कह रही है कहानी आपकी।"



चेहरे की उड़ी- उड़ी रंगत , कह रही है कहानी आपकी।
बहुत मजबूर, ग़मों से चूर लग रही है सूरत आपकी।
बोझिल पलकें बता रहीं हैं , कई रातों से नीदें अधूरी हैं आपकी।
चेहरे की उड़ी- उड़ी रंगत , कह रही है कहानी आपकी।
तितली की तरह उड़ना था आपको आकाश में
एक कमरे में सिमट कर रह गई है ज़िन्दगी आपकी।
कुछ ढूँढ रहीं है आपकी बैचेन निगाहें,
शायद कोई चीज खो गई है आपकी।
चेहरे की उड़ी- उड़ी रंगत , कह रही है कहानी आपकी।
टूट कर चकना चूर हो गई , दिल के कानिस पर
जो रखी थी ख्वाबों की तस्वीर आपकी।
कहने को तो मुस्करा रहें हैं आप, मगर सच कहते हैं हम।
पहले जैसी , वो मुस्कराहटें अब नहीं है आपकी।
चेहरे की उड़ी- उड़ी रंगत , कह रही है कहानी आपकी।

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